अहकूटा भयत्रस्तैः कृता त्वं होलि बालिशैः ।
अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम् ॥
होलिका की अग्नि में ईर्ष्या, द्वेष, बुराई का नाश हो और शुभता, शुभत्व एवं मंगल का नव दीप दैदीप्यमान हो। हर घर-आंगन में खुशहाली, समृद्धि और आनंद बढ़े, यही कामना करता हूं।
CM-MP