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केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दी श्रद्धांजलि
अभी भी विश्वास नहीं होता की प्रभात जी नहीं रहे
व्यक्ति के जाने के बाद उनका महत्व समझ आता है
प्रभात जी के जब पूरे जीवन को देखते हैं तो मैंने तो जब से उन्हें देखा झोला लेकर चलते देखा
क्रांति मशाल यात्रा के दौरान भी जब वो यात्रा से संबंधित नहीं थे पत्रकार थे तब भी उन्होंने उस यात्रा की सफलता के लिए पत्र लिखे
अपना हर काम कैसे सफल हो ये तड़प उनके अंदर थी
वो केवल व्यक्ति ही नहीं संस्था थे
राष्ट्रवादी विचारक नजर आते थे
पत्रकार तो ऐसे थे की उनकी लेखनी ने ग्वालियर स्वदेश को एक अलग पहचान दी थी
कार्यकर्ता के नाते एक अलग व्यक्तित्व थे
कार्यक्रमों से सीधे संबंधित न होते हुए भी सफल बनाने के लिए जुट जाते थे
जनशीर्वाद यात्रा हो या फिर क्रांति मशाल यात्रा हजारों नायब आइडिया उनके पास होते थे
राजनीति में कितने पदों पर रहे, प्रदेश अध्यक्ष के नाते तो मंडलों से भी सीधे संबंध रखते थे
एक एक दिन में कई कई मंडलों के कार्यकर्ताओं से संपर्क।कर लेते थे
बस एक कमी थी उनमें काम करते करते कभी अपने स्वस्थ का ख्याल नहीं रखते थे
एक बार में जबरदस्ती उन्हें चेन्नई इलाज के लिए ले गया था
जब तक वो जीवित रहे पार्टी के काम में जुटे रहे
जनशीर्वद यात्रा में जुटे रहे जब प्रदेश अध्यक्ष नहीं भी थे रूठों को मनाते रहे
जब दिल्ली इलाज के लिए ले जाया जा रहा था तो ये लग रहा था जल्दी लौटेंगे